Sunday, September 6, 2009

1.1 हिन्दी के "है" के लिए मगही के क्रिया-रूप

पाठकों, विशेषकर मगही-भाषियों, से निवेदन है कि मगही व्याकरण सम्बन्धी मेरे सन्देशों पर कोई टिप्पणी करने के पहले वे कृपया इस ब्लॉग की भूमिका एक बार अवश्य देख लें ।

मगही में क्रिया का रूप संज्ञा के लिंग (gender) पर निर्भर नहीं करता । उदाहरण के लिए -
लड़का जा हइ - लड़का जाता है ।
लड़की जा हइ - लड़की जाती है ।

1. 'ह' (to be) धातु के वर्तमानकाल के रूप
डॉ॰ ग्रियर्सन ने 'ह' धातु के स्थान पर "अह्" धातु माना है ("Seven Grammars ...", Part III, p.31) । शायद उन्होंने संस्कृत के "अस्" धातु के सकार को हकार में परिवर्तित करके मगही का धातु स्वीकार कर लिया है । डॉ॰ सम्पत्ति अर्याणी ने डॉ॰ ग्रियर्सन का अनुसरण किया है ("मगही व्याकरण प्रबोध", पृ॰107) । लेकिन डॉ॰ ग्रियर्सन का यह भी कहना है - "Note that throughout the initial अ of the root has disappeared" (वही, पृ॰31) । इस हालत में " अह् " के बदले "ह" धातु मानना ही उचित है ।

'ह' (to be) धातु के वर्तमानकाल के रूप

(हम) ही/ हूँ/ हकूँ, हिअइ/ हकिअइ, हियो/ हकियो, हिअउ/ हकिअउ

(तूँ - तू अर्थ में) हँ/ हकँऽ
(तूँ - तुम अर्थ में, अनादरार्थ) हीं/ हकहीं
(तूँ - तुम अर्थ में, आदरार्थ) ह/ हकऽ, हू / हकहू , हो / हकहो
(अपने) हथिन

(ऊ - अनादरार्थ) ह, हइ/ हकइ, हउ/ हकउ, (हे/) हके, हो/ हको, हन/ हकन
(ऊ - आदरार्थ) हका; हथन, हथिन, हथुन; हखन, हखिन, हखुन; -, हथी, हथू ; -, हखी, हखू

1.1 हिन्दी के "है" के लिए मगही के क्रिया-रूप

1.1.1 हिन्दी में "है" का प्रयोग अन्य पुरुष एकवचन (third person singular number) एवं मध्यम पुरुष एकवचन (second person singular number) अनादरसूचक "तू" के साथ किया जाता है । मगही में "तू" या "तूँ" अनादर सूचक भी हो सकता है या आदरार्थ भी । अतः क्रिया के रूप से ही स्पष्ट होता है कि इसका प्रयोग आदरार्थ है या अनादरार्थ । मगही में अनादरार्थ प्रयुक्त अन्य पुरुष बहुवचन कर्ता के साथ भी क्रिया का रूप एकवचन में ही होता है, अर्थात् हिन्दी के "है" के ही संगत (corresponding) मगही रूप का प्रयोग होता है, "हैं" का नहीं ।

हिन्दी के "है" के लिए मगही के क्रिया-रूप हैं –
(1) अन्य पुरुष एकवचन में - ह, हइ/ हकइ, हउ/ हकउ, (हे/) हके, हो/ हको, हन/ हकन
(2) अनादरार्थ प्रयुक्त "तू" या "तूँ" के साथ - हँ/ हकँऽ

नोटः जब मगही के "तू" या "तूँ" का प्रयोग हिन्दी के "तुम" अर्थ में किया जाता है तो "हँ/ हकँऽ" के स्थान पर "हीं/ हकहीं" का प्रयोग होता है ।

1.1.2 सामान्य कथन में (as a general statement) ककार रहित रूप का प्रयोग होता है, परन्तु जहाँ क्रिया पर थोड़ा जोर (stress) देना अपेक्षित हो वहाँ ककार सहित रूप का प्रयोग किया जाता है ।

1.1.3 'ह' का प्रयोग - इसका प्रयोग साधारणतः सातत्यबोधक (continuous) या पूर्ण (perfect) वर्तमानकाल (present tense) में भूतकाल (preterite) रूप के बाद सहायक क्रिया (auxiliary verb) के रूप में होता है । यह पुरुष और वचन (person and number) पर निर्भर नहीं करता अर्थात् हिन्दी में "वे कहाँ जा रहे हैं" जैसे वाक्यों में "रहे" और "हैं" क्रिया के दो-दो बहुवचन रूप प्रयुक्त होते हैं वहाँ मगही में यह बात नहीं । मगही में "हैं" के स्थान पर "है" का ही संगत रूप प्रयुक्त होता है, बहुवचन का संकेत भूतकाल रूप से ही प्राप्त हो जाता है । परन्तु यदि भूतकाल रूप अनुनासिकान्त हो तो इसका प्रभाव इसके ठीक बाद आनेवाले "" पर भी पड़ता है जिसके कारण अकसर इसके स्थान पर "हँ" सुनाई देता है और यदि अनुनासिकान्त ध्वनि "अँ" हो तो केवल "हँ" ही सुनाई देता है ।

उदाहरण -
ऊ काहाँ जा रहले ह ? - वह कहाँ जा रहा है ?
बुतरुआ कीऽ कर रहले ह ? - बच्चा क्या कर रहा है ?
ऊ काहाँ गेले ह ? - वह कहाँ गया/ गई है ?
ऊ कीऽ कइलके ह ? - उसने क्या किया है ?
सामा ओकरा बड़ी मार मरलके ह - श्याम ने उसे बहुत मार मारा है ।
ई चिठिया कोय पढ़लके ह ? - इस चिट्ठी को किसी ने पढ़ा है ?

ऊ सब (अनादरार्थ) काहाँ जा रहले ह ? - वे सब कहाँ जा रहे हैं ?
बुतरुअन (अनादरार्थ) कीऽ कर रहले ह ? - बच्चे क्या कर रहे हैं ?

ऊ सब (आदरार्थ) काहाँ जा रहलथिन ह/ हँ ? - वे सब कहाँ जा रहे हैं ?
बुतरुअन (आदरार्थ या प्यार सूचक) कीऽ कर रहलथिन ह/ हँ ? - बच्चे क्या कर रहे हैं ?

तू / तूँ कीऽ कर रहलहो ह ? - आप क्या कर रहे हैं ?

तू / तूँ कीऽ कर रहलँऽ हँ ? - तू क्या कर रहा है ?
तू / तूँ कीऽ कइलँऽ हँ ? - तूने क्या किया है ?
तू / तूँ ई कितब्बा पढ़लँऽ हँ ? - तूने यह किताब पढ़ी है ?

परन्तु,
अरे ! ऊ कीऽ कइले हइ/ हकइ ? जल्दी से बोला न ओकरा । - अरे ! वह क्या कर रहा है ? जल्दी से बुलाओ न उसे ।

इस उदाहरण में "कइले" का सातत्य वर्तमान (present continuous) के अर्थ में कुछ अधीरता, जल्दीबाजी, उत्सुकता या सावधानी अर्थ भी समाहित होता है । इस प्रकार के उदाहरण में 'कइले' शब्द वस्तुतः भूत कृदन्त (past participle) 'कइल' से बना है जिसका शाब्दिक अर्थ है - "किया हुआ" । यह शब्द सभी पुरुष और वचन में समान अर्थात् अविकृत रूप में रहता है और इसके बाद होना क्रिया का रूप ही पुरुष और वचन के अनुसार बदलता है (हइ, हउ, हको इत्यादि) । "कइले" का "किया हुआ" अर्थ में भी प्रयोग होता है, जैसे -
ऊ कीऽ कइले हइ/ हकइ ? - उसने क्या किया हुआ है ? (ऐसा सवाल योग्यता के बारे में हो सकता है, जैसे कि वह मैट्रिक किया हुआ है, या बी॰ए॰, एम॰ए॰, बी॰टेक्॰, ...?)

1.1.4 हइ/ हकइ के प्रयोग- अन्य पुरुष एकवचन में
(1) मुख्य क्रिया या संयोजक (copula) के रूप में , जैसे -
ऊ तो अभी बुतरु हइ/ हकइ - वह तो अभी बच्चा है ।
किरिसना छातर हइ/ हकइ - कृष्ण छात्र है ।

(2) सहायक क्रिया के रूप में, जैसे -
ऊ पढ़ऽ हइ/ हकइ - वह पढ़ता/ पढ़ती है ।
मंजुआ कीऽ करऽ हइ/ हकइ ? - मंजु क्या करती है ?
मंजुआ घर के काम-काज देखऽ हइ/ हकइ - मंजु घर का काम-काज देखती है ।

ऊ दिन भर कीऽ करते रहऽ हइ/ हकइ ? - वह दिन भर क्या करते रहता/ रहती है ?

1.1.5 हउ/ हकउ का प्रयोग - इसका प्रयोग तब किया जाता है जब वक्ता जिसे सम्बोधित कर बात कर रहा होता है वह व्यक्ति वक्ता की अपेक्षा हैसियत या उम्र में कम होता है । जैसे –
तोरा पढ़े-लिक्खे आवऽ हउ/ हकउ ? - तुझे पढ़ना-लिखना आता है ?
तोर बेटवा कीऽ करऽ हउ/ हकउ ? - तुम्हारा बेटा क्या करता है ?

इस उदाहरण में हिन्दी में 'करता है' क्रिया 'बेटा' कर्ता के अनुसार है, जबकि मगही में क्रिया 'हउ' या 'हकउ' श्रोता के अनुसार है जो हैसियत या ओहदा में वक्ता से बहुत नीचे है !

1.1.6 (हे/) हके का प्रयोग - इसका प्रयोग "हम" के साथ किसी अन्यपुरुष के व्यक्ति, वस्तु आदि के लिए किया जाता है । जैसे -
हमरा ओरा / ओकरा से कोय मतलब नयँ हके - हमें उससे कोई मतलब नहीं है ।
हम्मर ऊ केऽ हके ? - मेरा वह कौन (लगता) है ? (अर्थात् मेरा उससे कोई सम्बन्ध नहीं ।)

- ई तोर केऽ लगऽ हउ जे एतना परेशान हो रहलँ हँ ? - यह तेरा कौन लगता है जो तू इतना परेशान हो रहा है ?
- ई हम्मर बेटा हके । - यह मेरा बेटा है ।

ऊपर के प्रसंग पर ध्यान दें । यदि कोई सामान्य रूप से परिचय पूछ रहा हो तो "हके" का प्रयोग न होकर "हको" वगैरह का ही प्रयोग होगा ।
- ई तोर केऽ लगऽ हउ ? - यह तेरा कौन लगता है ?
- ई हम्मर बेटा हको । - यह मेरा बेटा है ।

यहाँ प्रश्नकर्ता कोई आदरणीय व्यक्ति है जिसकी अपेक्षा सम्बोधित व्यक्ति कम हैसियत वाला है ।

नोट: "हके" के संगत ककार रहित रूप "हे" का प्रयोग मेरे सुनने में नहीं आया ।

1.1.7 हो/ हको का प्रयोग - इसका प्रयोग तब किया जाता है जब वक्ता जिसे सम्बोधित कर बात कर रहा होता है वह व्यक्ति वक्ता की अपेक्षा हैसियत या उम्र में अधिक होता है । अतः यह आदरार्थ प्रयोग है । जैसे -
हमर बेटवा कलकत्ता में चपरासी के काम करऽ हो/ हको - मेरा बेटा कलकत्ता में चपरासी का काम करता है ।

इस उदाहरण में हिन्दी में 'करता है' क्रिया 'बेटा' कर्ता के अनुसार है, जबकि मगही में यह बात नहीं है । मगही में क्रिया 'हो' या 'हको' अव्यक्त श्रोता के अनुसार है जो वक्ता की दृष्टि में आदरणीय है !

मैं जब शायद हाई स्कूल में पढ़ता था (1960 के दशक के उतरार्द्ध में) तब चुनाव काल में कम्यूनिस्ट पार्टी के एक उम्मीदवार ने जनता के बीच अपने भाषण के दौरान जनसंघ पार्टी के बारे में निम्नलिखित टिप्पणी की थी -
मंगरू काका हो, जुम्मन भइया हो,
तनी मन में कर ल सोच-विचार
कि जनसंघ हको रंगल सियार
कि जनसंघ हको रंगल सियार ।


जनसंघ हको रंगल सियार - जनसंघ है रंगा सियार ।

इस उदाहरण में हिन्दी में 'है' क्रिया 'जनसंघ' के अनुसार है, परन्तु मगही में आदरार्थ 'हको' क्रिया 'जनसंघ' के अनुसार नहीं, बल्कि 'मंगरु काका' और 'जुम्मन भइया' के अनुसार है जो वक्ता के लिए आदरणीय हैं ।

नोटः
१. इस उदाहरण में 'हो' सम्बोधन हिन्दी/ संस्कृत में प्रयुक्त सम्बोधन शब्द 'हे' के अर्थ में प्रयुक्त है । कविता में इस प्रकार 'हो' का प्रयोग चल सकता है, परन्तु आम बोल-चाल में यह सम्बोधन उम्र या हैसियत में छोटे लोगों के लिए ही प्रयुक्त होता है । आदरार्थ सम्बोधन "जी", "अजी" आदि का प्रयोग किया जाता है ।

२. यहाँ लय हेतु 'हो' का उच्चारण 'होऽऽ' जैसा और 'हको' का उच्चारण 'हऽऽको' जैसा करना है ।

1.1.8 हन/ हकन का प्रयोग - यह भी आदरार्थ प्रयोग है । परन्तु, ऐसा प्रयोग किसी चीज या व्यक्ति के बारे में तब किया जाता है जब यह किसी ऐसे आदरणीय व्यक्ति से सम्बन्धित हो जिसे वक्ता सीधे सम्बोधित न कर रहा हो अर्थात् आदरणीय व्यक्ति अन्य पुरुष (third person) के रूप में प्रयुक्त हो । जैसे -
भवानीपुर के गोवर्धन शर्मा एगो धनी किसान तो हइये हथिन, भवानीपुर में लोहा सिमेंट के दोकानो हन/ हकन - भवानीपुर के गोवर्धन शर्मा एक धनी किसान तो हैं ही, भवानीपुर में लोहा सिमेंट की दुकान भी है ।
ऊ दोकान से निमन अमदनी हो जा हन/ हकन - उस दुकान से अच्छी आमदनी हो जाती है ।

उपर्युक्त उदाहरणों में हिन्दी में 'है' क्रिया 'दुकान' और 'आमदनी' के अनुसार है । परन्तु मगही में आदरार्थ 'हन' या 'हकन' क्रिया का प्रयोग अत्यन्त आदरणीय 'गोवर्धन शर्मा' जी के अनुसार है !

1.1.9 हँ/ हकँऽ के प्रयोग- इसका प्रयोग हिन्दी में प्रयुक्त "तू" के समानान्तर मगही में प्रयुक्त अनादरार्थ "तू" या "तूँ" के साथ
(1) मुख्य क्रिया या संयोजक (copula) रूप में किया जाता है । जैसे -
तू / तूँ हँ/ हकँऽ - तू है ।

(2) सहायक क्रिया के रूप में, जैसे -
तू / तूँ कीऽ करऽ हँ/ हकँऽ ? - तू क्या करता है ?
तू / तूँ इस्कूलवा पढ़े जा हँ/ हकँऽ ? - तू स्कूल पढ़ने जाता है ?

नोटः
(1) बिहारशरीफ की मगही में "है" के लिए साधारणतः 'हे' का प्रयोग नहीं होता जैसा कि अकसर प्रकाशित साहित्य में देखा जाता है । बिहारशरीफ के आसपास की मगही में "हे" का प्रयोग साधारणतः सम्बोधन के रूप में पाया जाता है ।

(2) प्रकाशित पत्रिकाओं/ पुस्तकों में “हन/ हकन” के स्थान में “हइन/ हकइन” रूप मिलते हैं ।

3 comments:

  1. बहुत सुन्दर प्रयास ।

    चिट्ठाजगत में आपका स्वागत है.......भविष्य के लिये ढेर सारी शुभकामनायें.

    गुलमोहर का फूल

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  2. सुंदर रचना के साथ स्वागत है

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  3. Bahut Barhia... aapka swagat hai...isi tarah likhte rahiye...

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